लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना के तहत भोजन बनाने वाले लाखों रसोइयों के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के लगभग 3.54 लाख रसोइयों के मानदेय में 1,000 रुपये प्रति माह की अतिरिक्त वृद्धि की गई है, जिसके बाद अब उनका मानदेय बढ़कर 3,000 रुपये प्रतिमाह हो गया है।
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘रसोइयों के सम्मान एवं कैशलेस चिकित्सा कार्ड वितरण समारोह’ के दौरान सरकार ने रसोइयों के सामाजिक सम्मान, स्वास्थ्य सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
दो बार पहले भी बढ़ा मानदेय, ड्रेस के लिए भी मिल रहे पैसे
योजना के तहत कार्यरत कुल 3.53 लाख से अधिक रसोइयों में लगभग 93 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो बच्चों के पोषण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रही हैं। योगी सरकार के कार्यकाल में मानदेय में यह तीसरी बड़ी वृद्धि है।
मानदेय बढ़ोतरी का इतिहास
वर्ष 2019-20 में 500 रुपये और वर्ष 2022-23 में 500 रुपये की वृद्धि कर इसे 2,000 रुपये किया गया था। अब वित्तीय वर्ष 2026-27 से 1,000 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी के साथ यह 3,000 रुपये हो गया है।
ड्रेस के लिए डीबीटी (DBT)
इसके अतिरिक्त, वर्ष में एक बार दो सेट यूनिफॉर्म/ड्रेस के लिए 500 रुपये की राशि सीधे रसोइयों के बैंक खाते में हस्तांतरित की जा रही है।
1.42 लाख स्कूलों के 1.46 करोड़ बच्चों तक पहुँच रहा पौष्टिक भोजन
प्रदेश के 1.42 लाख सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत 1.46 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को दैनिक आधार पर ताजा, गर्म और पौष्टिक आहार दिया जा रहा है।
प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5): प्रति छात्र 100 ग्राम खाद्यान्न (450 कैलोरी ऊर्जा और 12 ग्राम प्रोटीन)।
उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8): प्रति छात्र 150 ग्राम खाद्यान्न (700 कैलोरी ऊर्जा और 20 ग्राम प्रोटीन)।
सप्ताहिक फल व दूध: हर सप्ताह ताजे मौसमी फल और प्रत्येक बुधवार को दूध (प्राथमिक में 150 मि.ली. एवं उच्च प्राथमिक में 200 मि.ली.) का वितरण किया जाता है।
सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन: अतिरिक्त पोषण के तौर पर चिक्की, गुड़, चना और रामदाना के लड्डू वितरित किए जाते हैं।
किचन गार्डेन पहल: ताजी और जैविक सब्जियां उगाने के लिए स्कूलों में किचन गार्डेन विकसित किए गए हैं। इसके लिए स्थान उपलब्ध होने वाले विद्यालयों को ₹5,000 और अन्य को ₹2,000 की वित्तीय सहायता दी गई है।
केंद्रीकृत रसोई और पारदर्शिता के इंतजाम
राज्य के 25 जिलों में 136 सेंट्रलाइज्ड किचन संचालित हैं, जहाँ अक्षय पात्र फाउंडेशन और 127 स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से लगभग 10 लाख बच्चों तक भोजन पहुंचाया जा रहा है।
सख्त निगरानी प्रणाली: योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमित सोशल ऑडिट, टास्क फोर्स समीक्षा और आईवीआरएस (IVRS) आधारित दैनिक मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया है।
